
अगर आपकी गाड़ी पर ट्रैफिक चालान का भारी जुर्माना बकाया है, तो इस दिसंबर आपके पास एक बड़ा मौका है राहत पाने का। देशभर के कई राज्यों में 13 दिसंबर 2025 (शनिवार) को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है, जहां ट्रैफिक चालान सहित कई सिविल और क्रिमिनल मामलों का समाधान किया जाएगा। दिल्ली में हालांकि यह लोक अदालत कार्यक्रम 10 जनवरी 2026 को होगा, लेकिन बाकी राज्यों के वाहन मालिकों के लिए 13 दिसंबर की तारीख बेहद खास साबित हो सकती है।
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लोक अदालत में चालान माफ या कम कैसे होगा?
लोक अदालत में खास व्यवस्था की जाती है, जहां अदालत और विभाग के अधिकारी मिलकर मामलों को समझौते के जरिए निपटाते हैं। ट्रैफिक विभाग और पुलिस की उपस्थिति में वाहन मालिक अपने बकाया चालान पर बातचीत कर सकते हैं। यदि आपका मामला निपटाने योग्य पाया गया, तो चालान की राशि पूरी तरह माफ या काफी हद तक रियायती दर पर सेटल की जा सकती है।
टोकन बुकिंग की प्रक्रिया क्या है?
लोक अदालत का लाभ उठाने के लिए आपको पहले से अपना टोकन या अपॉइंटमेंट बुक करना होगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है।
निम्नलिखित सरल स्टेप्स अपनाकर आप यह बुकिंग कर सकते हैं –
- NALSA (National Legal Services Authority) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं — https://nalsa.gov.in।
- “Online Registration” या “Lok Adalat Appointment” सेक्शन में जाएं।
- मांगी गई जानकारियां जैसे – आपका नाम, केस टाइप, चालान नंबर, विवरण और संपर्क जानकारी भरें।
- फॉर्म सबमिट करने के बाद आपको ईमेल या SMS से एक टोकन नंबर प्राप्त होगा।
- यही टोकन आपको लोक अदालत में एंट्री व केस सेटलमेंट के लिए प्रस्तुत करना होगा।
लोक अदालत में ले जाने वाले जरूरी दस्तावेज
ट्रैफिक चालान माफ या कम करवाने के लिए ये जरूरी दस्तावेज अपने साथ रखें –
- ट्रैफिक चालान की फोटोकॉपी
- वाहन का RC (Registration Certificate)
- ड्राइविंग लाइसेंस की कॉपी
- आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र
- पुलिस या ट्रैफिक विभाग से मिले समन/नोटिस (यदि जारी हुआ हो)
- चालान भुगतान की पुरानी रसीदें (यदि पहले आंशिक भुगतान किया गया हो)
- यदि वाहन किसी और के नाम पर है तो उसका ऑथराइजेशन लेटर
क्यों जरूरी है लोक अदालत में जाना?
नेशनल लोक अदालत का उद्देश्य जनता को लंबे मुकदमों और जुर्मानों से राहत देना है। ऐसे मामलों में जहां दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार हों, वहां अदालत फैसला तुरंत करके मामला समाप्त कर देती है।
ट्रैफिक चालान जैसे छोटे लेकिन लंबित मामलों में यह बेहद फायदेमंद साबित होता है, क्योंकि न केवल जुर्माना कम हो सकता है, बल्कि कोर्ट की कार्यवाही से भी बचा जा सकता है।

















